मार्क्स का जन्मदिन

आज मार्क्स का जन्मदिन है. इस मौके पर कहना चाहता हूँ कि समाजवाद, वामपंथ, कम्युनिज्म और मार्क्सवाद एक-दूसरे से संबद्ध होते हुए भी स्वतंत्र अभीमुखीकरण रखते हैं.

कहना यह भी है कि रूस में लेनिन ने जबरन वर्ग चेतना वेनगार्ड्स के माध्यम रोपित की और चीन में माओ ने यह मानते हुए कि कम्युनिज्म के बाद भी द्वन्दात्मक पदार्थवाद जारी रहता है और सतत क्रांति का सिद्धांत अपनाया; इसलिए रूस और चीन की सफलता और असफलता सीधे ही मार्क्सवाद की सफलता-असफलता नहीं है.

मै बारंबार इस निष्कर्ष पर भी पहुंचता हूँ कि पूंजीवाद की जो विसंगतियाँ मार्क्सवाद ने चिन्हित कीं, उन्हीं पर काम करके पूंजीवाद ने कल्याणकारी राज्य का चोला पहना और वैश्वीकरण के रूप में आज समूचे विश्व में प्रभावी है.

#श्रीशउवाच

Comments

Popular posts from this blog

तितर-बितर मन : एक बड़बड़ाहट

क्या हम कभी इतने 'सभ्य' नहीं रहे कि 'हाशिया' ही ना रहे...?

“ सहज..2010..”