स्कोप, फील्ड का नहीं, आपका होता है

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बारहवीं के बाद क्या? मुझसे कई बार पूछा जाता है कि बच्चे को आगे क्या पढ़ाएँ, खासकर तब जब इंजीनियरिंग व मेडिकल का विकल्प ना चुनना हो। पूछते हैं कि किस क्षेत्र में कितना स्कोप है। मै बेधड़क कहता हूँ कि स्कोप फील्ड का नहीं स्टूडेंट का होता है। इंसान को हर फील्ड की जरूरत जबतक बनी हुई है, काबिल व्यक्ति की जरूरत भी बनी हुई है। आप होशियार हैं, मेहनती हैं और स्वयं में सुधार को तत्पर हैं तो कोई भी फील्ड आपकी जिंदगी बना सकता है। हर फील्ड को अपने सिकंदर की जरूरत होती है। इसके उलट कोई भी क्षेत्र बेहतरीन कैरियर की चकाचौंध सुरक्षा नहीं दे सकता। पड़ोस के किसी का कहीं सफल हो जाना आपके लिए भी उस क्षेत्र का बेहतरीन हो जाना नहीं साबित करता। आप, श्रम व लचीलेपन के लिए तैयार नहीं हैं तो किसी भी फील्ड में आपका स्कोप नहीं है।

भविष्य का मामला है, कई बार जवाब देते नहीं बनता। ज़ाहिर है कैरियर के बारे में सवाल करते लोगों को शिक्षा के उद्देश्य पर प्रवचन नहीं किया जा सकता। लोगों को पैसा, सम्मान, सुरक्षा चाहिए ही होता है और इसमें कुछ गलत नहीं लेकिन ये तीनों गलत तरीके से भी जरूर कमाए जा सकते हैं। बच्चे पर इन तीनों के लिए बनाया गया लगातार दबाव उन्हें इन तीनों के लिए कई बार शॉर्ट कट खोजने को मजबूर कर देता है और शॉर्ट कट सही कब होते हैं?

कैरियर चुनने में रुचि सबसे पहले स्थान पर रहे तो बेहतर ताकि काम, काम ही न लगे। रुचि के क्षेत्र में यदि बाजार कहता भी हो कि स्कोप कम है तो भी आगे बढ़ना समझदारी होगी क्योंकि उस क्षेत्र में भी बेहतरीन लोग चाहिए ही और आपकी रुचि में जब जज्बा व श्रम मिलेंगे तो यह चमत्कार लेकर आएंगे। रुचि महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि काम लगातार और लगभग जीवन भर ही करना है, मन का नहीं हुआ तो औरों की नज़र में सेट जिंदगी भी आपको बोझ लगेगी, रोबोट तो हम हैं नहीं जो रिसेट का बटन हो। रुचि जितनी गहरी और स्पष्ट हो उतना ही आपको किसी फील्ड के स्कोप के बारे में निश्चिंत होना चाहिए और सारी ऊर्जा अपने स्किल को मांजने में लगानी चाहिए, कुछ साल अंदर ही आप अपने ख्वाबों के करीब होंगे।

अपना स्वभाव भी देखें। आप काम करने के लिए निर्देशों की प्रतीक्षा नहीं कर सकते, अक्सर आपके मन में किसी काम को करने का बेहतर तरीका कुलबुलाता है तो ठहरकर सोचकर आपको स्वयं ही कुछ शुरू करना चाहिए। सपने आपके हैं, तो सबसे अधिक विश्वास भी आप करिए। दिक्कतें बिल्कुल आएँगी, नए पौधे को ऊपर उगने में पहले सतह की घास से लड़ना होता है, फिर एक दिन उस पेड़ के साये में कितनी ही घास पनाह लेती हैं।

उच्च शिक्षा या सिविल सर्विस, किसे चुनें? मध्यमवर्गीय परिवार का विद्यार्थी दोनों को एक-दूसरे का विकल्प बना तैयारी करता है। लेकिन यह दोनों एक-दूसरे के विकल्प हैं नहीं। सिविल सर्विस के विकल्प दूसरी प्रतियोगी परीक्षाएँ हो सकती हैं, मसलन बैंकिंग, एसएससी, एनडीए, राज्य सिविल सेवाएँ लेकिन उच्च शिक्षा में क्रमशः अधिक एकाग्र व गहरे होते जाना होता है। शांति, संतुष्टि, सुरक्षा, सम्मान व वैश्विक स्कोप चाहते हैं तो उच्च शिक्षा चुनें। पद, प्रतिष्ठा, वैभव चाहते हैं और दबाव बेहतर झेल सकते हैं तो सिविल सेवा चुनें। किसी वज़ह से सिविल सेवा व उच्च शिक्षा को एक साथ विकल्प बनाना ही पड़े तो इग्नू से गंभीरतापूर्वक उच्च शिक्षा जारी रखें व सिविल सेवा की तैयारी करें। वैसे उच्च शिक्षा के साथ पत्रकारिता का विकल्प अधिक मुफीद है यदि सार्वजानिक जीवन में मन रूचता हो।

स्नातक में विज्ञान या कला या वाणिज्य? यहाँ सर्वाधिक भ्रांतियाँ हैं। इन तीनों प्रवर्गों का स्कोप पूछा जाता है। स्कोप पर तो फिर कहूँगा कि यह विद्यार्थी का होता है क्योंकि मैंने हर फील्ड में बेहतरीन व्यक्तियों को देखा है। कैरियर बनाने वालों को बेहतरीन तो होना ही होगा। विज्ञान व वाणिज्य में तो बाजार जुड़ा है तो यहाँ थोड़ी आसानी होती है पर दिक्कत आती है कला विषयों के चयन में। कला विषयों में मनोविज्ञान, भूगोल और अर्थशास्त्र से भी बाजार जुड़ा है तो अवसर इनमें तुलनात्मक रूप से यकीनन अधिक है लेकिन इन तीनों के लिए रुचि और सामान्य विज्ञान में कुशलता होना प्राथमिक शर्त है। बहुधा कला विषय इसलिए लिए जाते हैं तो ताकि सिविल सेवा में सहूलियत हो। एक बड़े हद तक यह निश्चित ही सिविल सेवा में मदद करता है लेकिन जिस तरह से सिविल सेवा में बदलाव किए जा रहे, यह मदद कम होती जा रही।

राजनीति, दर्शन, इतिहास, समाज अध्ययन व साहित्य के विषय जिन्हें कि बाजार का साथ नहीं मिल रहा, वे यकीनन कैरियर चयन में पिछड़ते जा रहे हैं। एक बात बेलौस कहना चाहूँगा कि ये विषय नौकरी या नौकर बनाने वाले हैं भी नहीं। यदि आप अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व बनाए रखना चाहते हैं, समाज व राजनीति में स्थान बनाना चाहते हैं तो यह विषय चुनें। ये व्यक्तियों पर प्रभाव के विषय हैं, इनमें आपको निर्णायक बनना होता है न कि निर्देशों को मानना होता है। इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को राजनीति, लेखन, पत्रकारिता, उच्च शिक्षा व समाज सेवा के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए।

शिक्षाशास्त्र एक उपयोगी चयन है क्योंकि प्रशिक्षित अध्यापक के लिए बाजार और समाज में सर्वदा ही अवसर है। फाइन आर्ट एवं संगीत, नृत्य जैसे प्रदर्शन विधा के विषय पूरी तरह अभ्यास व प्रतिभा पर आधारित हैं तो इनमें स्कोप की बात करना ही बेमानी है। विधि का क्षेत्र बेहतरीन है, इसमें अवसर भी है, धन भी, प्रतिष्ठा भी, पद भी और सार्वजानिक जीवन का सुख भी, किंतु इसमें औसत के लिए स्थान लगभग नहीं है। कई दूसरे क्षेत्र भी हैं जैसे रक्षा अध्ययन, क्राफ्ट, डिजाइन आदि इनमें रुचि ही मानक है।

कभी घबराए नहीं, खुश रहें। कोई भी सफलता इतनी बड़ी नहीं कि अपनी विनम्रता गँवायी जाय और कोई भी असफलता इतनी बड़ी नहीं कि अपना स्वभाव दाँव पर लगाया जाय। आप जो हैं, अनूठे और निरे एक ही हैं। कैरियर के अनिश्चित, अंधेरे रास्ते में आपका स्वयं पर अदम्य विश्‍वास ही एक मात्र टॉर्च है जिसमें कभी हार न मानने की भावना की बैटरी लगी होती है।

आपका पथ प्रशस्त हो।

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