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Showing posts from August 29, 2010

आज की रात देखा मैंने ये स्वप्न : कोई बतायेगा इसके निहितार्थ

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.....सड़क पार कर रहा हूँ, कुछ लोगों के साथ .इनमें एक मेरे आदरणीय मित्र हैं. बाकी अनजाने लोग हैं. उन अनजाने लोगों का मुखिया एक व्यक्ति जो मेरे मित्र का परिचित है, और सफ़ेद कुरता जैसे छात्र-नेता लोग पहनते हैं, पहने हुए है. उसका रुख अच्छा नही है, हम दोनों के लिए. हमें कहीं ले जाया जा रहा है. मेरा इस प्रकरण से कोई लेना-देना नही है. न ही मुझे कहीं जाने के लिए बाध्य किया गया है. पर मै अपने मित्र के साथ जा रहा हूँ, उन्हें हिम्मत बधाते हुए. अचानक उस टोली में मुझे भी मेरा एक पुराना परिचित दिखता है जो उन लोगों के साथ है. यह परिचित व्यक्ति बेहद दुष्ट है.  .....फिर मैंने देखा मेरे मित्र को एक आगे से खुले हुए कमरे में एक कुर्सी पर बिठा दिया गया है. मेरे मित्र शांत-गंभीर बैठे हुए हैं. उनकी मुद्रा से प्रतीत होता ही जैसे वे कहना चाह रहे हों कि-क्या डर; सांच को आंच नही. बारिश हो रही है. अब परिदृश्य में केवल तीन लोग हैं. मै बाहर भीग रहा हूँ. वह लंबा, कुर्ता वाला व्यक्ति एक छोटे से टेंट के नीचे बैठा है. मै सोच रहा हूँ कि उस व्यक्ति से पूछकर मै भी उस कमरे में बैठ जाऊं. पर वह मेरी उपेक्षा करता है....