Posts

Showing posts with the label राजनीतिक साक्षरता

राजनीतिक दल से उम्मीदों की प्रश्नावली

Image
देर-सबेर सभी राजनीतिक दल यह एहसास करा ही देते हैं कि उनका मकसद सत्ता भोगना ही है। एक समर्पित कार्यकर्त्ता को फिर दुसरे दलों के पुराने करतूतों का कच्चा-चिट्ठा रखने के अलावा और कुछ सूझता नहीं है। कई बार कार्यकर्ता व्यक्तिगत दुश्वारियाँ और दुश्मनी पाल लेते हैं और अक्सर चुनाव के बाद जब उनके राजनीतिक आका आपस में गलबहियाँ कर लेते हैं तो उस वक्त दिल में कहीं नश्तर सा लगता है और दुनिया के बड़े ज़ालिम होने का एहसास होता है। राजनीतिक दल अपनी परिभाषा में ही सत्ता के लिए संघर्षशील होते हैं, तो सत्ता के लिए संघर्ष करने में कोई बुराई नहीं है। किन्तु राजनीतिक दल, महज सत्ताप्राप्ति के ही निमित्त नहीं होते हैं। हाँ, यह अवश्य ही है कि सत्ताप्राप्ति ही उनका एकमात्र ध्येय बनकर रह गया है।  संविधान सभा की मंशा यह नहीं थी कि नागरिक, किसी दल विशेष के होकर रह जाएँ। देश के भीतर अनगिनत मुद्दे होते हैं और वे मुद्दे अपनी बदलती प्राथमिकता और प्रासंगिकता में परिदृश्य पर उभरते हैं। किसी मुद्दे के सार्थक निस्तारण हेतु सम्यक नीति और कार्ययोजना की आवश्यकता होती है जिससे अधिकतम नागरिकों का वृहत्तम हित सधे। एक राजनीतिक ...

‘आई हेट पॉलिटिक्स': एक पिछड़ा और गैर-जिम्मेदार जुमला

Image
साभार: दिल्ली की सेल्फी  राजनीति' एक अद्भुत शब्द है। यह विषय भी है और व्यवहार भी, प्रक्रिया भी है और कला भी। इतनी घुली-मिली है कि जो इसमें रूचि नहीं लेता यह उसमें भी रूचि लेती है। राजनीति का केवल एक 'सार्वजानिक' पक्ष ही हमें दिखलाई पड़ता है और इस पक्ष के जो खिलाड़ी हैं उनके चरित्र से ही समूचे राजनीति का हम चरित्र-चित्रण कर देते हैं। राजनीति का यह 'सार्वजानिक पक्ष' भी हमें इतना प्रभावी रूप से दृष्टिगोचर इसलिए होता है क्योंकि हमनें 'लोकतांत्रिक' शासन प्रणाली अपनाई है और इसकी कई संक्रियाओं में हमें स्वयं को परिभाग करने का अवसर मिलता है। किन्तु 'राजनीति' को केवल उसके इस सार्वजानिक पक्ष से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि उससे पहले यह इस सार्वजानिक पक्ष का दर्शन तैयार करती है, इस प्रश्न का उत्तर तैयार करती है कि आखिर हमें कोई व्यवस्था क्यों चाहिए और अंततः यह व्यवस्था हम कैसे आत्मसात करने जा रहे हैं! यह सभी महत्वपूर्ण बिंदु हैं। विषय के रूप में 'राजनीति' पल-पल बदलते व्यक्ति के बहुमुखी विकास की चिंता करती है। व्यवहार के रूप में 'राजनीति' उन प्रक्र...