प्रखर दैनंदिनी: 25 July 2020
25 July 2020
Prakhar Dainandini
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| Image Source: On the World Map |
अक्सर जब ठहरकर सोचता हूँ, तो खुद को उधेड़बुन में पाता हूँ. आसपास चीजें कितनी गुथी-मुथी हुई हैं. शायद ही किसी कि जिंदगी इतनी सपाट होती हो कि सब कुछ बस सफ़ेद और काले में बंटा हुआ हो. बहुत मन करता है कि काश चीजें सारी एकदम सुलझी हुई हों. अभी तो पीछे मुड़कर देखने लगो तो दिखता है कि कितना वक्त गुजर गया, गुजरता जा रहा...! हर वक्त लगता है कि लगाम जैसे अपने हाथ में है, लेकिन जब भी ईमानदारी से मुड़ो पीछे तो लगता है कि नहीं मै तो बस बहे जा रहा. शायद सब को ही भ्रम है कि लगाम उनके हाथ में है. फिर अफ्रीका का मैप याद आने लगता है और फिर लगता है कि जिंदगी ठीक है, कुछ ऐसी ही चलती होगी. सीधी जिंदगी तो अभिशाप ही होती होगी.
-श्रीश
नोयडा वेस्ट

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