बैक्टीरिया और वायरस

27/04/2020

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बैक्टीरिया शत्रु सेना समूह हैं, उनके आक्रमण पर हमारे शरीर के प्रतिरक्षा सैनिक तत्पर हो मुकाबला करते हैं। हमारे सैनिक हारते हैं तो शरीर बीमार हो मरता है। ज्यादातर हमारे सैनिक जीतते हैं और शरीर स्वस्थ हो जाता है। इस जीत की रणनीतियों की याद शरीर अपने में सुरक्षित कर लेता है, फिर भविष्य में भी यह अवसर आने पर इस्तेमाल की जाती है। शत्रु सेना समूह अपनी रणनीतियों में बदलाव करते हैं तो हमारे सैनिक भी। टीकाकरण, शिशु को किसी रोग के बेहद कमजोर बैक्टीरिया से संक्रमित करना है ताकि उसके शरीर के प्रतिरक्षा सैनिक उसे हराकर जरूरी रणनीतियों की याद को भविष्य के लिए संजो सके।

वायरस चुगलखोर चिट्ठी सा है जिसमें भ्रामक सूचनाएँ हैं। इस चिट्ठी को पढ़ हमारे प्रतिरक्षा सैनिक भड़क सकते हैं, आपस में ही एक-दूसरे से लड़ने लग सकते हैं और फिर शरीर किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए अपने सैनिकों को अक्षम पाता है और बीमार हो जाता है। हमारे प्रतिरक्षा सैनिक जब और जैसे ही जान पाते हैं कि यह वायरस की यह चिट्ठी झूठी है तो वे सम्हल जाते हैं और फिर पूरी शक्ति से लड़ने लग जाते हैं। कैसे एक झूठ को झूठ समझा गया, इस रणनीति को भी भविष्य के लिए शरीर याद रखता है। वायरस अपने झूठ को नए- नए सच की तरह परोसते रहते हैं। इसके लिए टीका आसान नहीं है क्योंकि यहाँ मुकाबला बराबरी का नहीं है। यहाँ सैनिकों को सैनिकों से नहीं अपितु झूठी सूचनाओं से भरी चिट्ठी से लड़ना है। एक खतरनाक झूठ, भीतर से चीर देता है, बलिष्ठ सैनिक भी लाचार हो उठते हैं।

कोरोना एक नया वायरस है। इसका टीका तैयार होने में समय लगना ही है। झूठ से लड़ना इतना आसान नहीं। अभी हमें फिजिकल डिस्टेंसिंग करते हुए स्वच्छता का पालन करते रहना है। मुँह, नाक और आँख को स्वयं के ही हाथों से बचाना है अन्यथा हाथ हमारे आजकल भस्मासुर बनने को तैयार हैं।


-डॉ. श्रीश 

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