भारत ने क्यों किया वोट खिलाफ अमेरिका के ?
आप इतना समझें कि वर्ल्ड पॉलिटिक्स में अमूमन नैतिकता महज इतनी होती कि वह किया जाय जिससे राष्ट्रहित को फायदा पहुंचे। जिसे हम आप डिप्लोमेसी कहते हैं , कूटनीति कहते हैं , वर्ल्ड पॉलिटिक्स में इसके मायने बस इतना है कि कैसे अपना राष्ट्रहित बचाते हुए जहाँ कहीं मौका मिले वहाँ इसे बढ़ाया जाय। वर्ल्ड पॉलिटिक्स की एक खास बात और समझ लें तो भारत की हालिया अमेरिका के खिलाफ की गयी वोटिंग समझ आ जाएगी। वर्ल्ड पॉलिटिक्स anarchic है , माने यहाँ कोई एक नियामक शक्ति नहीं है जैसे कि देशों के भीतर सरकारें होती हैं। इसलिए अपने हितों की सुरक्षा स्वयं करनी होती है। हितों की सुरक्षा सभी अन्य देशों से किसी न किसी रीति से जुड़ने में अधिकतम होती है। दुनिया के सभी देश घोषित तौर पर कुछ भी प्रवचन दें , किन्तु सभी देशों से किसी न किसी रीति से जुड़ने की सम्भावना को टटोलते रहते हैं। इसीलिये कहते हैं कि , वर्ल्ड पॉलिटिक्स में कोई स्थाई शत्रु नहीं होता और न होता है कोई स्थाई मित्र ही। लोकतंत्र में चुनाव जीतना बेहद कठिन होता है। बहुमत के मत संजोने होते हैं। अमेरिकी चुनाव में यहूदी मत और हथियारों की ल...